सभ्यता के उद्भव काल से ही शिक्षा का बहुआयामी महत्व रहा है क्योंकि शिक्षा द्वारा ही व्यक्ति का मौलिक एवं आध्यात्मिक उत्कर्ष सम्भव है, और साथ ही इससे व्यक्ति विभिन्न उत्तरदायित्वों को निभाना सीखता है। वस्तुतः ज्ञान अथवा विद्या से व्यक्ति का कर्म और आचरण परिष्कृत और दिव्य हो जाता है और वह ज्ञान सम्पन्न होकर देवतुल्य हो जाता है। भारतीय मनीषियों के अनुसार जीवन का चरम लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करना है। यही कारण है कि भारतीय वाङ्मय में ऋते ज्ञानान्नामुक्ति, इतरे ज्ञानमुक्ति का उद्बोध सुनाई पड़ता है।
प्राचीन काल से ही ज्ञान-विज्ञान की शिक्षा प्रदान करने के लिए विभिन्न अध्ययन केन्द्रों की स्थापना की जाती रही है। राम गुलाम राय पी०जी० कॉलेज, बनकटाशिव, सलेमपुर भी देवरिया जिले के इस अति पिछड़े क्षेत्र में इसी श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इस क्षेत्र में इण्टरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उच्च शिक्षा ग्रहण करना सामान्य परिवार के विद्यार्थियों के लिए अत्यन्त कठिन था। ऐसी दशा में क्षेत्र के वरिष्ठ एवं बौद्धिक व्यक्तियों के आग्रह एवं विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को देखते हुए सन 2002 में राम गुलाम राय महाविद्यालय समिति के माध्यम से राम गुलाम राय महाविद्यालय की स्थापना की गयी। स्थापना के समय से ही महाविद्यालय निरन्तर प्रगति पथ पर अग्रसर है। विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास को दृष्टिगत रखते हुए राष्ट्रीय सेवा योजना की चार इकाइयाँ महाविद्यालय में संचालित हैं। महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को सामाजिक उत्तरदायित्वों के निर्वहन के योग्य बनाने का कार्य भी किया जाता है। इसके अतिरिक्त खेल-कूद प्रतियोगिता, विश्वविद्यालय एथलेटिक मीट, वार्षिक प्रतियोगिताओं में भाग लेकर विद्यार्थियों ने अपने बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया है। यह समस्त उपलब्धियाँ कुशल प्रबन्धन व योग्य शिक्षकों, कर्मचारियों की निष्ठा एवं कार्य के प्रति ईमानदारी के कारण ही सम्भव हो सकी हैं।
अन्त में क्षेत्र के सभी वरिष्ठ, बौद्धिक एवं जिम्मेदार नागरिकों का सुझाव अपेक्षित है। इसके लिए सम्पूर्ण महाविद्यालय परिवार आपका आभारी रहेगा।